ब्यूरो-शहज़ाद मोहम्मद
शहडोल। भारतीय जनता पार्टी की कामकाजी बैठक से नगर पालिका परिषद अनूपपुर की आगामी चुनाव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। पार्टी में एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी रहे नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी व बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह जैसे दावेदारों के बीच नगर व्यापारी संघ के राकेश गौतम ने भी पार्टी के जिला अध्यक्ष व संभागीय संगठन मंत्री से अपने नाम पर भी विचार किए जाने का अनुरोध किया। सूत्रों के अनुसार ओमप्रकाश द्विवेदी पार्टी गाइड लाइन के हिसाब से फिट नही बैठ रहे हैं लेकिन वह एक बार पुनः अध्यक्ष बनने की चाहत में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तैयारी मे हैं। उनके व उनके खास लोगों के बीच अब सम्बन्ध सामान्य भी नही हैं शायद इसलिए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष द्विवेदी एक एनजीओ के माध्यम से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी उनके इस रुख पर क्या निर्णय लेती है? ज़बाव समय आने पर ही मिल सकता है। पूर्व न. पा. अध्यक्ष व भा. ज. पा. नेता गजेंद्र सिंह के बीच आपसी मनमुटाव पार्टी को ज्ञात है। आगे भी यह तय है कि ये दोनों नेता एक दूसरे के विरुद्ध ही कार्य करेंगे। पूर्व अध्यक्ष द्विवेदी नगर के मुस्लिम आबादी के प्रति अन्य भा. ज. पा. नेताओं से अधिक समर्पित रहे हैं वे सदैव मुस्लिम धर्म स्थलों के देख रेख व निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं, बावजूद इसके वे मुस्लिम मतदाताओं का विश्वास हासिल नही कर सके, यही कारण रहा कि द्विवेदी के सबसे ज्यादा विश्वास पात्र अध्यक्ष उम्मीदवार 2013 का चुनाव हार गये। वर्तमान परिदृश्य में यदि ओमप्रकाश द्विवेदी वास्तव में अल्पसंख्यक समुदाय का विश्वास पाना चाहते हैं तो अपने स्थान पर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष बाबा खान को पार्टी से टिकट दिए जाने की पैरवी कर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति अपनी जबावदेही सुनिश्चित कर सकते हैं। इस तरह अभी तक जो नाम आये हैं वे सब एक दूसरे के प्रति सहज नही हैं। वास्तव में यदि बीजेपी आगामी नगर पालिका चुनाव जीतना चाहती है तो उसे अपने स्तर से बिना किसी प्रभाव में आये सजगता से प्रत्याशी का चयन करना होगा।
